Weather Update Today: देशभर में मौसम एक बार फिर करवट लेने जा रहा है। बीते कुछ दिनों में तापमान में बढ़ोतरी के कारण ऐसा लग रहा था कि सर्दी अब विदाई की तैयारी में है, लेकिन ताजा पूर्वानुमानों ने तस्वीर बदल दी है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने उत्तर और मध्य भारत के कई हिस्सों में वर्षा, तेज हवाओं, गरज-चमक और पहाड़ी क्षेत्रों में बर्फबारी की संभावना जताई है। एक सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से 17 से 19 फरवरी के बीच मौसम में उल्लेखनीय परिवर्तन देखने को मिल सकता है।
इस मौसमी प्रणाली का असर राजधानी से लेकर पहाड़ी राज्यों और मध्य भारत तक दिखाई देगा। तापमान में गिरावट, बादलों की आवाजाही और कहीं-कहीं तेज हवाएं लोगों को फिर से सर्दी का एहसास करा सकती हैं।
दिल्ली-एनसीआर में बदलेगा तापमान का रुख
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और आसपास के एनसीआर क्षेत्रों में हाल के दिनों में दिन का तापमान सामान्य से ऊपर दर्ज किया गया था। दोपहर के समय हल्की गर्मी महसूस होने लगी थी, जिससे यह अनुमान लगाया जा रहा था कि ठंड अब खत्म होने वाली है। हालांकि नए पूर्वानुमान के अनुसार 17 फरवरी से आसमान में बादल छाने लगेंगे और 18 फरवरी को हल्की बूंदाबांदी की संभावना है।
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बारिश भले ही बहुत अधिक न हो, लेकिन बादलों की मौजूदगी और ठंडी हवाएं दिन के तापमान में कमी ला सकती हैं। इससे लोगों को दोपहर की हल्की गर्मी से राहत मिलेगी और सुबह-शाम की ठंड एक बार फिर महसूस हो सकती है।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश में गरज-चमक के साथ बारिश
उत्तर प्रदेश के पश्चिमी जिलों में इस मौसम प्रणाली का अधिक प्रभाव देखने को मिल सकता है। 17 और 18 फरवरी को कई स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश के साथ गरज-चमक की संभावना जताई गई है। कुछ इलाकों में तेज हवाएं भी चल सकती हैं।
बारिश के चलते अधिकतम तापमान में गिरावट दर्ज की जा सकती है। किसानों के लिए यह बारिश फसलों के लिहाज से मिश्रित प्रभाव डाल सकती है—जहां हल्की वर्षा लाभकारी हो सकती है, वहीं तेज हवा या ओलावृष्टि नुकसान पहुंचा सकती है। इसलिए स्थानीय प्रशासन और किसानों को मौसम अपडेट पर नजर बनाए रखने की सलाह दी गई है।
पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ में अलर्ट
उत्तर-पश्चिम भारत के राज्यों पंजाब और हरियाणा के साथ-साथ चंडीगढ़ में भी 17 और 18 फरवरी को मौसम अस्थिर रह सकता है। इन क्षेत्रों में गरज के साथ बारिश, बिजली चमकने और तेज हवाओं की चेतावनी जारी की गई है।
मौसम विभाग ने लोगों को सलाह दी है कि खराब मौसम के दौरान खुले स्थानों से दूर रहें और पेड़ों या बिजली के खंभों के नीचे खड़े होने से बचें। यातायात पर भी इसका असर पड़ सकता है, खासकर सुबह और शाम के समय जब दृश्यता कम हो सकती है।
राजस्थान के उत्तरी जिलों में हल्की बारिश के आसार
राजस्थान के उत्तरी हिस्सों—विशेषकर श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, बीकानेर और चूरू—में 17 और 18 फरवरी को हल्की बारिश और तेज हवाएं चलने की संभावना है। यहां सामान्यतः फरवरी के मध्य तक मौसम शुष्क रहता है, लेकिन पश्चिमी विक्षोभ के कारण वातावरण में नमी बढ़ेगी।
तेज हवाओं के कारण तापमान में गिरावट आ सकती है। दिन के समय हल्की ठंड लौट सकती है और रात के तापमान में भी कुछ कमी दर्ज की जा सकती है। स्थानीय लोगों को सावधानी बरतने और मौसम विभाग की सलाह का पालन करने की हिदायत दी गई है।
मध्य प्रदेश में 18 फरवरी के बाद असर
मध्य प्रदेश में मौसम परिवर्तन का प्रभाव 18 फरवरी के बाद अधिक स्पष्ट रूप से देखने को मिलेगा। सिवनी, बालाघाट, छिंदवाड़ा, कटनी और नर्मदापुरम जैसे जिलों में बादल छाने के साथ गरज-चमक और हल्की बूंदाबांदी की संभावना है।
हालांकि यहां भारी वर्षा की संभावना कम है, लेकिन बदलते मौसम के कारण तापमान में हल्की गिरावट आ सकती है। सुबह और रात के समय ठंडक फिर से महसूस हो सकती है। यह बदलाव खासकर उन लोगों के लिए ध्यान देने योग्य है जो मान रहे थे कि सर्दी पूरी तरह समाप्त हो चुकी है।
पहाड़ी राज्यों में बर्फबारी और बारिश
उत्तर भारत के पर्वतीय क्षेत्रों में मौसम का सबसे ज्यादा प्रभाव देखने को मिल सकता है। जम्मू और कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के ऊंचाई वाले इलाकों में 17 से 19 फरवरी के बीच भारी बर्फबारी की संभावना है।
निचले क्षेत्रों में बारिश हो सकती है, जिससे ठंड दोबारा बढ़ेगी। श्रीनगर, शिमला, कुल्लू और अनंतनाग जैसे क्षेत्रों में तापमान में गिरावट दर्ज की जा सकती है। ऊंचे पहाड़ी दर्रों और सड़कों पर बर्फ जमने से यातायात प्रभावित हो सकता है।
पर्यटकों के लिए यह मौसम रोमांचक हो सकता है, क्योंकि उन्हें ताजा बर्फबारी का अनुभव मिलेगा। हालांकि प्रशासन ने यात्रियों को सावधानी बरतने और यात्रा से पहले स्थानीय मौसम जानकारी प्राप्त करने की सलाह दी है।
दक्षिण भारत में निकोबार द्वीप समूह पर असर
दक्षिणी क्षेत्र में निकोबार द्वीप समूह में 17 फरवरी तक तेज हवाओं के साथ भारी बारिश और बिजली गिरने का खतरा बना हुआ है। यहां 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं। समुद्री गतिविधियों से जुड़े लोगों को विशेष सतर्कता बरतने को कहा गया है।
मछुआरों और तटीय इलाकों में रहने वाले लोगों को समुद्र में न जाने की सलाह दी गई है, क्योंकि ऊंची लहरें और खराब मौसम जोखिम बढ़ा सकते हैं।
क्या होगा आगे?
इस सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से उत्तर भारत में बढ़ती गर्मी पर अस्थायी विराम लगेगा। दिन के तापमान में गिरावट और बादलों की आवाजाही से मौसम सुहावना हो सकता है। हालांकि गरज-चमक और बिजली गिरने जैसी स्थितियां जोखिमपूर्ण हो सकती हैं।
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मौसम विभाग ने लोगों से अपील की है कि वे खराब मौसम के दौरान सुरक्षित स्थानों पर रहें, अनावश्यक यात्रा से बचें और बिजली गिरने के समय खुले मैदान या ऊंचे स्थानों पर खड़े न हों। किसानों, यात्रियों और पर्यटकों को विशेष रूप से सतर्क रहने की आवश्यकता है।
फिलहाल इतना तय है कि फरवरी के इस सप्ताह में मौसम एक बार फिर चौंकाने वाला मोड़ लेने जा रहा है, जो लोगों को सर्दी के अंतिम दौर का एहसास करा सकता है।













