Weather Update 2026: फरवरी का महीना आमतौर पर सर्दी से गर्मी की ओर बढ़ते संक्रमण का समय माना जाता है, लेकिन इस वर्ष मौसम का मिजाज कुछ ज्यादा ही उतार-चढ़ाव भरा नजर आ रहा है। देश के अलग-अलग हिस्सों में अलग तरह की मौसमी गतिविधियां देखने को मिल रही हैं। कहीं बादलों की आवाजाही और हल्की बारिश के संकेत हैं तो कहीं तापमान में तेज बढ़ोतरी चिंता का कारण बन रही है। आने वाले कुछ दिनों में यह बदलाव और स्पष्ट रूप से दिखाई देगा।
मौसम विभाग के अनुसार पहाड़ी क्षेत्रों में सक्रिय हो रहे नए पश्चिमी विक्षोभ का असर उत्तर भारत के बड़े हिस्से पर पड़ेगा। इसके प्रभाव से पर्वतीय और मैदानी इलाकों में बादल छाने और हल्की वर्षा की संभावना बन रही है। दूसरी ओर, पश्चिमी और दक्षिणी भारत में तापमान सामान्य से ऊपर जाने के संकेत मिल रहे हैं।
उत्तर भारत में पश्चिमी विक्षोभ का प्रभाव
पहाड़ी क्षेत्रों में बारिश और हिमपात
नए सिस्टम के सक्रिय होने से सबसे पहले असर ऊंचाई वाले इलाकों में दिखाई देगा। गिलगित-बाल्टिस्तान, मुजफ्फराबाद, लद्दाख और जम्मू-कश्मीर के ऊंचे इलाकों में हल्की बारिश और बर्फबारी की संभावना है। ऊंचाई वाले क्षेत्रों में ताजा हिमपात से ठंड एक बार फिर बढ़ सकती है, जिससे स्थानीय जनजीवन प्रभावित हो सकता है।
इन क्षेत्रों में रहने वाले लोगों और यात्रियों को विशेष सतर्कता बरतने की जरूरत होगी, क्योंकि बर्फबारी के कारण सड़क मार्ग बाधित हो सकते हैं और तापमान में अचानक गिरावट आ सकती है।
मैदानी इलाकों में बादल और हल्की बारिश
पर्वतीय क्षेत्रों के बाद इसका असर मैदानी राज्यों में भी देखने को मिलेगा। पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान के उत्तरी हिस्सों और उत्तर प्रदेश के पश्चिमी भागों में बादल छाने और कुछ स्थानों पर हल्की बारिश या बूंदाबांदी की संभावना है।
हालांकि यह बारिश बहुत व्यापक या तेज नहीं होगी, लेकिन इससे दिन के तापमान में हल्की गिरावट और मौसम में ठंडक का अहसास हो सकता है। किसानों के लिए यह हल्की वर्षा रबी फसलों के लिहाज से लाभकारी साबित हो सकती है, बशर्ते बारिश सीमित मात्रा में ही हो।
ठंडी हवाओं में कमी और बढ़ता तापमान
उत्तर-पश्चिमी ठंडी हवाओं की तीव्रता में कमी आने से मैदानी इलाकों में सुबह और रात की ठंड पहले की तुलना में कम महसूस की जा रही है। पिछले कुछ दिनों में न्यूनतम तापमान में धीरे-धीरे बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
विशेष रूप से पश्चिमी तटीय शहरों में गर्मी का असर तेजी से बढ़ रहा है। मुंबई से लेकर बेंगलुरु तक कई स्थानों पर अधिकतम तापमान 35 से 37 डिग्री सेल्सियस के बीच पहुंचने की संभावना है। फरवरी के मध्य में इस तरह का तापमान सामान्य से अधिक माना जाता है।
तटीय इलाकों में यदि पारा 37 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचता है तो स्थानीय स्तर पर लू जैसी परिस्थितियां बन सकती हैं। फिलहाल यह स्थिति व्यापक नहीं है, लेकिन कुछ इलाकों में इसके शुरुआती संकेत मिल रहे हैं। यदि तापमान में यही रुझान बना रहा तो लोगों को समय से पहले गर्मी का सामना करना पड़ सकता है।
दक्षिण भारत में 20 फरवरी के बाद सक्रियता
बंगाल की खाड़ी से नया सिस्टम
20 फरवरी के बाद मौसम में एक और बदलाव की संभावना जताई जा रही है। बंगाल की खाड़ी के ऊपर बनने वाला निम्न दबाव क्षेत्र दक्षिण भारत में व्यापक वर्षा का कारण बन सकता है।
विशेष रूप से तमिलनाडु और केरल में अच्छी बारिश की संभावना व्यक्त की जा रही है। इन राज्यों में कई जिलों में मध्यम से भारी वर्षा दर्ज की जा सकती है, जिससे तापमान में गिरावट आएगी और मौसम सुहावना हो सकता है।
अन्य राज्यों पर संभावित असर
दक्षिणी सिस्टम का प्रभाव आगे चलकर कर्नाटक और आंध्र प्रदेश तक भी पहुंच सकता है। इसके अलावा मध्य भारत के कुछ हिस्सों जैसे ओडिशा और छत्तीसगढ़ में भी बादलों की आवाजाही और छिटपुट बारिश देखने को मिल सकती है।
हालांकि इन क्षेत्रों में वर्षा बहुत अधिक नहीं होगी, लेकिन मौसम में अस्थिरता बनी रह सकती है। किसानों और स्थानीय प्रशासन को मौसम की ताजा जानकारी पर नजर बनाए रखनी चाहिए।
इस सर्दी में बारिश की भारी कमी
इस बार शीतकालीन सीजन में वर्षा की स्थिति चिंताजनक रही है। देशभर में सामान्य से काफी कम बारिश दर्ज की गई है। कई क्षेत्रों में वर्षा की कमी 50 प्रतिशत से भी अधिक आंकी गई है।
पूर्वी उत्तर प्रदेश और मध्य भारत के कई हिस्सों में तो 70 से 90 प्रतिशत तक की कमी दर्ज की गई है। इसका सीधा असर कृषि, जल संसाधनों और भूजल स्तर पर पड़ सकता है। यदि आने वाले हफ्तों में भी पर्याप्त बारिश नहीं होती है तो गर्मियों के दौरान जल संकट गहरा सकता है।
किसानों और आम जनता के लिए सलाह
मौसम के इस बदलते रुख को देखते हुए किसानों को अपनी फसलों की सिंचाई और संरक्षण पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। जहां हल्की बारिश की संभावना है, वहां जल निकासी की व्यवस्था दुरुस्त रखना जरूरी है। वहीं जिन क्षेत्रों में तापमान बढ़ रहा है, वहां फसलों को समय पर पानी देना लाभकारी रहेगा।
आम लोगों को भी मौसम के अनुसार अपनी दिनचर्या में बदलाव करना चाहिए। सुबह-शाम हल्की ठंड और दिन में बढ़ती गर्मी के कारण सर्दी-जुकाम जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं। पर्याप्त पानी पीना, धूप से बचाव और संतुलित आहार इस समय बेहद जरूरी है।
निष्कर्ष
कुल मिलाकर देश का मौसम इस समय संक्रमण के दौर से गुजर रहा है। उत्तर भारत में अगले कुछ दिनों तक बादल, हल्की बारिश और पर्वतीय क्षेत्रों में हिमपात का सिलसिला जारी रह सकता है। वहीं पश्चिमी और दक्षिणी हिस्सों में तापमान सामान्य से ऊपर जाने के संकेत मिल रहे हैं। 20 फरवरी के बाद दक्षिण भारत में एक नए सिस्टम से बारिश की गतिविधियां तेज हो सकती हैं।
आने वाले दिनों में मौसम की यह विविधता देश के अलग-अलग हिस्सों में अलग-अलग प्रभाव डालेगी। ऐसे में ताजा पूर्वानुमानों पर नजर रखना और आवश्यक सावधानियां बरतना ही समझदारी होगी।











