North India Weather Update: फरवरी के मध्य में उत्तर भारत का मौसम एक बार फिर बदलता नजर आ रहा है। पिछले कुछ दिनों से जहां अधिकांश इलाकों में मौसम शुष्क बना हुआ था, वहीं अब वातावरण में नमी बढ़ने और दबाव तंत्र के सक्रिय होने से कई राज्यों में बारिश की शुरुआत हो चुकी है। मौसम विभाग के अनुसार आने वाले 24 से 48 घंटों के दौरान राजस्थान, हरियाणा, दिल्ली-एनसीआर और पश्चिमी मध्य प्रदेश सहित कई क्षेत्रों में हल्की से मध्यम वर्षा देखने को मिल सकती है। कुछ स्थानों पर गरज-चमक और तेज हवाओं के साथ मौसम अधिक सक्रिय रहने की संभावना है।
चक्रवाती परिसंचरण से बदला मौसम का रुख
मौसम में आए इस परिवर्तन के पीछे मुख्य कारण पाकिस्तान के मध्य भागों के ऊपर बना प्रेरित चक्रवाती परिसंचरण है। इस प्रणाली के प्रभाव से उत्तर-पश्चिम भारत की ओर नमी युक्त हवाओं का प्रवाह बढ़ा है। अरब सागर से उठ रही नमी जब इस चक्रवाती तंत्र से जुड़ती है, तो बादलों का विकास तेजी से होता है। परिणामस्वरूप राजस्थान के उत्तरी और पूर्वी जिलों में बादल घिरने लगे हैं और कई स्थानों पर हल्की बारिश दर्ज की गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह प्रणाली धीरे-धीरे मजबूत हो रही है। यदि नमी की आपूर्ति इसी तरह जारी रही, तो राजस्थान के अलावा दक्षिणी हरियाणा और पश्चिमी मध्य प्रदेश में भी बारिश की गतिविधियां तेज हो सकती हैं। हालांकि यह व्यापक और लगातार होने वाली वर्षा नहीं होगी, लेकिन स्थानीय स्तर पर तेज बौछारें और मेघ गर्जना देखने को मिल सकती है।
दिल्ली-एनसीआर और आसपास के क्षेत्रों में बारिश की संभावना
राजधानी दिल्ली और इसके आसपास के क्षेत्रों में भी मौसम का असर साफ दिखाई देगा। 18 फरवरी के आसपास दिल्ली-एनसीआर में बादल छाने और हल्की बारिश होने की संभावना जताई गई है। गुरुग्राम, फरीदाबाद, नूंह, पलवल और रेवाड़ी जैसे इलाकों में भी रुक-रुक कर बूंदाबांदी हो सकती है।
इस दौरान तेज हवाएं चलने की भी संभावना है, जिससे दिन के तापमान में हल्की गिरावट दर्ज की जा सकती है। हालांकि न्यूनतम तापमान में बहुत अधिक बदलाव की उम्मीद नहीं है, लेकिन बादलों की वजह से सुबह और शाम के समय ठंड का अहसास बढ़ सकता है। प्रदूषण के स्तर में भी अस्थायी रूप से कमी आने की संभावना है, क्योंकि बारिश और हवाएं वातावरण को साफ करने में सहायक होती हैं।
मध्य प्रदेश और पश्चिमी उत्तर प्रदेश पर असर
मध्य प्रदेश के पश्चिमी और उत्तरी हिस्सों में भी इस मौसम प्रणाली का प्रभाव देखने को मिलेगा। ग्वालियर संभाग, शिवपुरी, गुना, उज्जैन, भोपाल और इंदौर जैसे क्षेत्रों में बादल छाए रह सकते हैं और हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। कुछ स्थानों पर गरज के साथ छींटे पड़ने की संभावना है।
वहीं पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मथुरा, आगरा, झांसी और ललितपुर जैसे जिलों में भी वर्षा को लेकर चेतावनी जारी की गई है। किसानों और स्थानीय प्रशासन को सतर्क रहने की सलाह दी गई है, क्योंकि अचानक होने वाली बारिश से खेतों में खड़ी फसलों को नुकसान पहुंच सकता है।
इसके विपरीत पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल के अधिकांश हिस्सों में फिलहाल मौसम शुष्क बने रहने की संभावना है। इन क्षेत्रों में तापमान सामान्य से थोड़ा ऊपर रह सकता है और वर्षा की कोई बड़ी गतिविधि देखने को नहीं मिलेगी।
ओलावृष्टि का खतरा और किसानों के लिए चेतावनी
मौसम विशेषज्ञों ने विशेष रूप से राजस्थान, दक्षिणी हरियाणा और पश्चिमी मध्य प्रदेश के किसानों को सतर्क रहने की सलाह दी है। भले ही व्यापक और भारी बारिश की संभावना कम हो, लेकिन ऊंचे बादलों के विकास के कारण कुछ स्थानों पर ओलावृष्टि हो सकती है। ओले गिरने से गेहूं, सरसों और सब्जियों जैसी फसलों को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है।
तेज हवाओं और बिजली कड़कने की घटनाएं भी इस दौरान हो सकती हैं। खुले खेतों में काम कर रहे किसानों और मजदूरों को खराब मौसम के दौरान सुरक्षित स्थानों पर रहने की सलाह दी गई है। पशुपालकों को भी अपने पशुओं को खुले मैदानों से हटाकर सुरक्षित स्थानों पर रखने की आवश्यकता है।
मौसम में इस तरह के उतार-चढ़ाव का असर मंडियों और परिवहन व्यवस्था पर भी पड़ सकता है। यदि किसी क्षेत्र में ओलावृष्टि होती है, तो फसलों की गुणवत्ता प्रभावित होने से किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।
दक्षिण भारत में भी सक्रिय हुआ मौसम
जहां उत्तर भारत में चक्रवाती परिसंचरण से बारिश हो रही है, वहीं दक्षिण भारत में भी एक अलग मौसम प्रणाली सक्रिय हो चुकी है। श्रीलंका के निकट बने कम दबाव के क्षेत्र के कारण दक्षिणी प्रायद्वीपीय हिस्सों में वर्षा की गतिविधियां बढ़ी हैं। इसका प्रभाव विशेष रूप से तमिलनाडु और दक्षिणी केरल में देखने को मिल सकता है।
19 और 20 फरवरी के दौरान इन राज्यों में मध्यम से भारी बारिश होने की संभावना है। तटीय इलाकों में तेज हवाएं भी चल सकती हैं। कुछ स्थानों पर जलभराव की स्थिति उत्पन्न हो सकती है, इसलिए प्रशासन ने आवश्यक तैयारियां शुरू कर दी हैं।
कर्नाटक के आंतरिक हिस्सों में हल्की वर्षा
दक्षिणी आंतरिक कर्नाटक के कुछ जिलों में भी बादल छाने और हल्की बारिश होने की संभावना जताई गई है। बेंगलुरु, मैसूर और मांड्या सहित आसपास के क्षेत्रों में रुक-रुक कर बूंदाबांदी हो सकती है। हालांकि यहां भारी बारिश की आशंका कम है, लेकिन मौसम सुहावना बना रह सकता है।
बारिश के कारण दिन के तापमान में हल्की गिरावट आ सकती है, जिससे लोगों को गर्मी से राहत मिलेगी। फरवरी के अंत तक तापमान में धीरे-धीरे वृद्धि होने की संभावना रहती है, लेकिन फिलहाल सक्रिय मौसम प्रणाली के कारण वातावरण में ठंडक बनी रहेगी।
फिर बदलेगा तापमान का रुख
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार 20 फरवरी के बाद उत्तर-पश्चिमी हवाएं दोबारा सक्रिय हो सकती हैं। इन शुष्क और ठंडी हवाओं के प्रभाव से तापमान में फिर से गिरावट दर्ज की जा सकती है, खासकर उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में। इससे सुबह और रात के समय ठंड का असर बढ़ सकता है।
हालांकि यह गिरावट बहुत अधिक नहीं होगी, लेकिन दिन और रात के तापमान में अंतर बढ़ सकता है। बदलते मौसम के इस दौर में लोगों को स्वास्थ्य संबंधी सावधानियां बरतने की सलाह दी गई है, क्योंकि अचानक तापमान परिवर्तन से सर्दी-जुकाम और वायरल संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।
कुल मिलाकर फरवरी का यह चरण मौसम की दृष्टि से काफी सक्रिय साबित हो रहा है। उत्तर और दक्षिण भारत दोनों ही क्षेत्रों में अलग-अलग मौसम प्रणालियों के प्रभाव से वर्षा की गतिविधियां देखने को मिल रही हैं। आने वाले दिनों में इन प्रणालियों की तीव्रता और दिशा के अनुसार मौसम की स्थिति में और बदलाव संभव है।










