EPFO Pension Scheme 2026: साल 2026 में कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) ने पेंशन से जुड़े नियमों में बड़ा सुधार करते हुए करोड़ों कर्मचारियों को राहत दी है। नए बदलावों के तहत अब 36 महीने की अनिवार्य सेवा संबंधी शर्त को समाप्त कर दिया गया है और हर पात्र पेंशनभोगी को कम से कम ₹7,500 मासिक पेंशन देने की व्यवस्था की गई है। यह कदम खास तौर पर निजी क्षेत्र में काम करने वाले कर्मचारियों और कम अवधि की सेवा करने वालों के लिए बेहद फायदेमंद साबित होगा।
सरकार का उद्देश्य बुजुर्गों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना और रिटायरमेंट के बाद स्थिर आय सुनिश्चित करना है। इसी दिशा में यह नया संशोधन लागू किया गया है, जिससे पेंशन व्यवस्था पहले से अधिक समावेशी और व्यावहारिक बन गई है।
कर्मचारी पेंशन योजना (EPS) क्या है?
कर्मचारी पेंशन योजना (EPS) संगठित क्षेत्र के कर्मचारियों के लिए संचालित एक सामाजिक सुरक्षा योजना है। इसकी शुरुआत 1995 में की गई थी, हालांकि कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) अधिनियम 1952 से लागू है। इस योजना का उद्देश्य कर्मचारियों को रिटायरमेंट के बाद नियमित पेंशन उपलब्ध कराना है।
कर्मचारी के वेतन से हर महीने 12 प्रतिशत भविष्य निधि (PF) के रूप में जमा होता है। इसमें से 8.33 प्रतिशत राशि पेंशन फंड में ट्रांसफर की जाती है। पेंशन योग्य वेतन की अधिकतम सीमा 15,000 रुपये प्रतिमाह निर्धारित है। इस फंड का संचालन नियोक्ता और सरकार की भागीदारी से होता है।
36 महीने की सेवा शर्त में बड़ी राहत
पहले नियमों के अनुसार पेंशन प्राप्त करने के लिए न्यूनतम 10 वर्ष की सेवा अनिवार्य थी। यदि किसी कर्मचारी की सेवा अवधि 36 महीने (3 वर्ष) से कम होती थी, तो उसे नियमित पेंशन का लाभ नहीं मिलता था। ऐसे कर्मचारियों को केवल एकमुश्त भुगतान (रिडेम्प्शन बेनिफिट) दिया जाता था।
नए संशोधन के तहत 36 महीने की यह शर्त समाप्त कर दी गई है। अब केवल 6 महीने की सेवा पूरी करने के बाद भी पेंशन के लिए पात्रता बन सकती है। यह बदलाव उन कर्मचारियों के लिए बेहद उपयोगी है जो किसी कारणवश नौकरी जल्दी छोड़ देते हैं या बार-बार नौकरी बदलते हैं।
इस कदम से लाखों कर्मचारियों को लाभ मिलेगा और पेंशन व्यवस्था अधिक लचीली बनेगी। साथ ही, पूरी प्रक्रिया को डिजिटल माध्यम से सरल बनाया गया है ताकि आवेदन और स्वीकृति की प्रक्रिया तेज हो सके।
₹7,500 न्यूनतम पेंशन की गारंटी
अब तक न्यूनतम पेंशन की राशि 1,000 रुपये थी, जिसे पहले 1,500 रुपये तक बढ़ाया गया था। लेकिन 2026 के सुधारों में इसे सीधे बढ़ाकर 7,500 रुपये प्रति माह कर दिया गया है। यह वृद्धि पेंशनभोगियों के लिए बड़ी राहत मानी जा रही है।
नई व्यवस्था के अनुसार, चाहे किसी कर्मचारी की सेवा अवधि कम हो या वेतन सीमित रहा हो, उसे न्यूनतम 7,500 रुपये मासिक पेंशन अवश्य मिलेगी। सरकार ने इसके लिए अलग से विशेष कोष का प्रावधान किया है ताकि कम पेंशन पाने वालों को टॉप-अप राशि दी जा सके।
जिन कर्मचारियों की सेवा अवधि लंबी रही है या जिनका औसत वेतन अधिक है, उन्हें इससे अधिक पेंशन मिलेगी। इस प्रकार न्यूनतम सीमा तय होने के बावजूद उच्च वेतन वालों को उनकी गणना के अनुसार अधिक लाभ मिलेगा।
पेंशन की गणना कैसे की जाती है?
कर्मचारी पेंशन योजना में पेंशन की गणना एक निर्धारित सूत्र के आधार पर की जाती है:
पेंशन = (पेंशन योग्य वेतन × पेंशन योग्य सेवा) ÷ 70
यहां पेंशन योग्य वेतन पिछले 60 महीनों के औसत वेतन के आधार पर तय होता है। अधिकतम वेतन सीमा 15,000 रुपये मानी जाती है।
उदाहरण के तौर पर यदि किसी कर्मचारी का औसत पेंशन योग्य वेतन 15,000 रुपये है और उसने 20 वर्ष की सेवा पूरी की है, तो उसकी गणना के अनुसार पेंशन लगभग 4,300 रुपये बनती है। लेकिन नई व्यवस्था के तहत उसे न्यूनतम 7,500 रुपये मासिक पेंशन दी जाएगी।
इससे कम सेवा अवधि वाले कर्मचारियों को भी निश्चित आय का भरोसा मिलेगा।
सरकार और EPFO का योगदान
पेंशन फंड को मजबूत बनाए रखने के लिए सरकार और EPFO दोनों की भूमिका अहम है। पेंशन योजना में 8.33 प्रतिशत योगदान के अतिरिक्त 1.16 प्रतिशत का योगदान EPFO द्वारा दिया जाता है।
2026 के बजट में सरकार ने लगभग 50,000 करोड़ रुपये का विशेष कोष बनाने की घोषणा की है। यह कोष न्यूनतम पेंशन की गारंटी सुनिश्चित करने और पुराने पेंशनभोगियों को भी लाभ देने के उद्देश्य से तैयार किया गया है।
नियोक्ता के 12 प्रतिशत पीएफ योगदान में से 3.67 प्रतिशत हिस्सा पेंशन खाते में जाता है। इस सामूहिक योगदान से फंड का संतुलन बनाए रखने और भविष्य की पेंशन देनदारियों को पूरा करने में मदद मिलती है।
पात्रता और मिलने वाले प्रमुख लाभ
यह योजना 18 से 58 वर्ष तक के संगठित क्षेत्र के उन कर्मचारियों के लिए है जो EPF के सदस्य हैं और EPS में नियमित योगदान करते हैं। 58 वर्ष की आयु पूरी करने पर नियमित पेंशन शुरू हो जाती है।
मुख्य लाभ इस प्रकार हैं:
रिटायरमेंट के बाद आजीवन पेंशन
परिवार को पारिवारिक पेंशन की सुविधा
दिव्यांगता की स्थिति में विशेष पेंशन
अचानक मृत्यु होने पर आश्रितों को पेंशन
महिलाओं के लिए विशेष प्रावधान
36 महीने की शर्त हटने से कम अवधि तक सेवा करने वाले कर्मचारियों को भी सुरक्षा कवच मिलेगा।
आवेदन प्रक्रिया: कैसे करें पेंशन के लिए आवेदन?
पेंशन प्राप्त करने की प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल बना दिया गया है। कर्मचारी UMANG ऐप या EPFO की आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं।
सबसे पहले यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (UAN) को सक्रिय करना आवश्यक है। इसके बाद आधार, बैंक खाता और अन्य KYC विवरण अपडेट करें। फिर ऑनलाइन Form 10D भरकर आवश्यक दस्तावेज अपलोड करें।
आवेदन जमा करने के लगभग 30 दिनों के भीतर पेंशन स्वीकृत हो सकती है। जिनकी सेवा अवधि पहले 36 महीने से कम थी, उनके लिए भी अब नई प्रक्रिया के तहत आवेदन संभव है। आवश्यकता पड़ने पर EPFO कार्यालय में जाकर भी सहायता ली जा सकती है।
अन्य महत्वपूर्ण सुधार
2026 के अपडेट में पेंशन की वार्षिक समीक्षा का प्रावधान भी जोड़ा गया है। अब महंगाई दर के आधार पर समय-समय पर पेंशन राशि में संशोधन किया जाएगा।
डिजिटल पेंशन कार्ड जारी करने की योजना भी लागू की गई है, जिससे पेंशनभोगियों को पहचान और भुगतान संबंधी सुविधा आसान होगी। परिवार पेंशन को 50 प्रतिशत तक सुनिश्चित किया गया है और बच्चों के लिए शैक्षणिक सहायता जोड़ने पर भी विचार किया गया है।
इसके अलावा, स्वास्थ्य बीमा से लिंक करने का प्रयास किया जा रहा है ताकि बुजुर्गों को चिकित्सा सुरक्षा भी मिल सके।
निष्कर्ष
EPFO पेंशन योजना 2026 में किए गए बदलाव सामाजिक सुरक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हैं। 36 महीने की अनिवार्य सेवा शर्त हटाना और 7,500 रुपये की न्यूनतम पेंशन सुनिश्चित करना लाखों कर्मचारियों के लिए राहत लेकर आया है। इससे न केवल रिटायरमेंट के बाद आय की स्थिरता बढ़ेगी बल्कि कम अवधि तक कार्यरत कर्मचारियों को भी भविष्य की आर्थिक चिंता से मुक्ति मिलेगी।
यदि आप EPF सदस्य हैं, तो अपने दस्तावेज अपडेट रखें और समय पर आवेदन कर इस योजना का लाभ अवश्य उठाएं। यह सुधार आपके और आपके परिवार के सुरक्षित भविष्य की मजबूत नींव साबित हो सकता है।












