CBSE Board Exam 2026: 17 फरवरी 2026 से देशभर में CBSE बोर्ड की 10वीं और 12वीं की परीक्षाएं शुरू हो रही हैं और इस बार कहानी थोड़ी अलग है। सिर्फ किताबें पढ़ लेना काफी नहीं, अब आंसर शीट लिखने का तरीका भी उतना ही अहम हो गया है। बोर्ड ने साफ निर्देश जारी किए हैं कि उत्तर पुस्तिका को प्रश्नपत्र के सेक्शन के अनुसार ही बांटना होगा। जो छात्र पुराने ढर्रे पर लिखने की सोच रहे हैं, उन्हें अभी संभल जाना चाहिए, क्योंकि इस बार लापरवाही सीधे अंकों पर असर डाल सकती है।
गौतम बुद्ध नगर में 58 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं जहां कड़ी निगरानी में परीक्षाएं होंगी। हर केंद्र पर प्रवेश से लेकर बैठने की व्यवस्था तक सख्त नियम लागू किए गए हैं। लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा जिस बात की है, वह है आंसर शीट का नया पैटर्न। पहले छात्र अपनी सुविधा से उत्तर लिखते थे, लेकिन अब हर विषय और उसके सेक्शन के अनुसार जवाब लिखना अनिवार्य कर दिया गया है।
आंसर शीट में सेक्शन के अनुसार ही लिखने होंगे जवाब, वरना नहीं मिलेंगे पूरे अंक
बोर्ड ने स्पष्ट कर दिया है कि जिस सेक्शन का प्रश्न है, उसका उत्तर उसी सेक्शन में लिखा जाना चाहिए। उदाहरण के तौर पर यदि विज्ञान के पेपर में फिजिक्स, केमिस्ट्री और बायोलॉजी अलग-अलग भागों में हैं, तो उनके उत्तर भी उसी क्रम और उसी भाग में लिखे जाने चाहिए। यदि कोई छात्र फिजिक्स का उत्तर बायोलॉजी सेक्शन में लिख देता है, तो परीक्षक को कॉपी जांचने में दिक्कत होगी और अंक कट सकते हैं।
यह बदलाव इसलिए किया गया है ताकि मूल्यांकन प्रक्रिया और अधिक व्यवस्थित और पारदर्शी बन सके। बोर्ड चाहता है कि कॉपी जांचने में भ्रम की स्थिति न बने और हर उत्तर अपने सही स्थान पर मिले। सुनने में यह साधारण बात लग सकती है, लेकिन परीक्षा हॉल के तनाव में छोटी-सी गलती भी भारी पड़ सकती है। इसलिए अभी से अभ्यास करें कि उत्तर उसी क्रम में लिखें जिस क्रम में प्रश्नपत्र में दिए गए हैं।
कई छात्र इस बदलाव से मानसिक दबाव महसूस कर रहे हैं। काउंसलर्स के पास रोजाना दर्जनों कॉल आ रहे हैं जिनमें छात्र यही पूछ रहे हैं कि यदि सेक्शन गलत हो गया तो क्या होगा। सच्चाई यह है कि नियम का पालन करेंगे तो कोई परेशानी नहीं होगी। बोर्ड ने पहले ही गाइडलाइन जारी कर दी है, बस उसे ध्यान से पढ़ना और समझना जरूरी है।
मैप बाइंडिंग में लापरवाही न करें, इतिहास और भूगोल में खास सावधानी जरूरी
इतिहास और भूगोल के पेपर में मैप का महत्व हमेशा से रहा है। इस बार बोर्ड ने साफ कहा है कि मैप को आंसर शीट के अंतिम खाली पन्नों के बीच ही बांधा जाए। उसे बीच में या किसी और स्थान पर लगाने की अनुमति नहीं है। यदि छात्र निर्देशों का पालन नहीं करते, तो संबंधित प्रश्न के अंक नहीं मिलेंगे।
परीक्षा के दौरान अक्सर जल्दबाजी में छात्र मैप कहीं भी स्टेपल कर देते हैं। यह आदत अब छोड़नी होगी। मैप को साफ-सुथरे तरीके से, निर्देशानुसार ही लगाएं। रोल नंबर और जरूरी विवरण ठीक से भरें। छोटे नियम ही बड़े अंकों की रक्षा करते हैं।
याद रखिए, बोर्ड परीक्षा सिर्फ ज्ञान की परीक्षा नहीं होती, यह अनुशासन की भी परीक्षा होती है। जिसने नियमों का पालन किया, वही आगे निकलेगा।
छात्रों पर बढ़ता मानसिक दबाव, लेकिन घबराने की जरूरत नहीं
10वीं के छात्रों के लिए यह पहला बड़ा बोर्ड अनुभव होता है। ऐसे में नया पैटर्न सुनकर घबराहट स्वाभाविक है। लेकिन सच यह है कि यह बदलाव छात्रों के खिलाफ नहीं, बल्कि व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए किया गया है। अगर आप नियमित अभ्यास कर रहे हैं और मॉडल पेपर हल कर चुके हैं, तो यह पैटर्न आपके लिए मुश्किल नहीं होगा।
सबसे बेहतर तरीका है कि घर पर उत्तर लिखने का अभ्यास भी उसी तरह करें जैसे परीक्षा में करना है। सेक्शन बनाएं, हेडिंग साफ रखें और प्रश्न संख्या स्पष्ट लिखें। इससे दिमाग में एक अनुशासित ढांचा तैयार होगा। परीक्षा हॉल में वही आदत काम आएगी।
माता-पिता को भी चाहिए कि वे बच्चों पर अतिरिक्त दबाव न डालें। भरोसा दें, वातावरण शांत रखें। याद रखिए, परीक्षा जीवन का अंत नहीं, एक पड़ाव भर है।
परीक्षा केंद्रों पर सख्ती, समय से पहले पहुंचे और नियमों का पालन करें
परीक्षा केंद्र पर समय से कम से कम 30 मिनट पहले पहुंचें। एडमिट कार्ड और जरूरी दस्तावेज साथ रखें। ड्रेस कोड और अन्य निर्देशों का पालन करें। मोबाइल फोन या इलेक्ट्रॉनिक गैजेट ले जाने की भूल न करें। इस बार निगरानी और अधिक सख्त होगी।
हर साल कुछ छात्र छोटी गलतियों के कारण परेशानी में पड़ जाते हैं। इस बार ऐसी गलती की कोई गुंजाइश न रखें। नियम पहले पढ़ लें, समझ लें और उसी अनुसार तैयारी करें।
अनुशासन और स्पष्टता ही दिलाएंगे सफलता
पुराने समय में कहा जाता था कि परीक्षा की तैयारी सिर्फ किताबों से नहीं, आदतों से होती है। आज भी यह बात उतनी ही सच है। साफ लिखावट, सही क्रम, और नियमों का पालन – यही सफलता की असली चाबी है।
CBSE बोर्ड की यह नई पहल छात्रों को व्यवस्थित लेखन की आदत सिखाएगी। आगे चलकर यही अनुशासन प्रतियोगी परीक्षाओं और उच्च शिक्षा में काम आएगा। इसलिए इसे बोझ न समझें, बल्कि अवसर की तरह लें।
अब वक्त है आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने का। घबराहट को किनारे रखें, नियमों को समझें और तैयारी को अंतिम रूप दें। 17 फरवरी से शुरू होने वाली यह परीक्षा आपके भविष्य की दिशा तय कर सकती है, लेकिन याद रखें – मेहनत, संयम और अनुशासन से बड़ा कोई हथियार नहीं।
डटकर तैयारी कीजिए, सही पैटर्न अपनाइए और पूरे आत्मविश्वास के साथ परीक्षा हॉल में कदम रखिए। सफलता उन्हीं के कदम चूमती है जो नियमों का सम्मान करते हैं और अंत तक हिम्मत नहीं हारते।









