मौसम का बड़ा अलर्ट, बंगाल की खाड़ी में बढ़ी हलचल, जानें किन राज्यों में बारिश और तेज हवाओं का असर Bay of Bengal Weather Alert

By Vidya

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Bay of Bengal Weather Alert

Bay of Bengal Weather Alert: फरवरी का महीना अब अपने मध्य चरण में पहुँच चुका है और देशभर में मौसम का मिजाज तेजी से बदलता दिखाई दे रहा है। सर्दी का असर धीरे-धीरे कम हो रहा है, वहीं कई हिस्सों में तापमान सामान्य से ऊपर दर्ज किया जा रहा है। इस बीच बंगाल की खाड़ी में मौसम प्रणाली के सक्रिय होने की खबरों ने चिंता बढ़ा दी है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, समुद्री क्षेत्रों में बन रही परिस्थितियाँ आने वाले दिनों में चक्रवाती गतिविधियों को जन्म दे सकती हैं। हालांकि अभी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है, लेकिन संकेत यह बताते हैं कि मौसम में बड़ा बदलाव संभव है।

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उत्तर भारत में पश्चिमी विक्षोभ का असर

पहाड़ी क्षेत्रों में हलचल

हाल ही में एक पश्चिमी विक्षोभ पहाड़ी राज्यों तक पहुँचा, जिसके कारण जम्मू-कश्मीर, लद्दाख और हिमाचल प्रदेश के ऊँचे इलाकों में हल्की वर्षा और बर्फबारी की संभावना बनी। ऊँचाई वाले क्षेत्रों में बादलों की आवाजाही बढ़ी है, जिससे ठंड का हल्का प्रभाव अभी भी बना हुआ है। हालांकि भारी बर्फबारी जैसी स्थिति फिलहाल नजर नहीं आ रही, लेकिन मौसम में अस्थिरता बनी हुई है।

मैदानी इलाकों में बढ़ती गर्मी

दिल्ली, पंजाब और हरियाणा जैसे मैदानी राज्यों में सुबह के समय हल्की ठंडक महसूस की जा रही है, परंतु दोपहर होते-होते तेज धूप के कारण तापमान तेजी से बढ़ रहा है। कई स्थानों पर अधिकतम तापमान 23 से 24 डिग्री सेल्सियस तक पहुँच चुका है, जो सामान्य से अधिक है। साफ आसमान और सूखी हवाओं के कारण दिन के समय गर्मी का एहसास बढ़ रहा है। आने वाले दिनों में यह प्रवृत्ति और मजबूत हो सकती है।

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16 फरवरी के आसपास नया पश्चिमी विक्षोभ

मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, 16 फरवरी के आसपास एक और प्रभावशाली पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय हो सकता है। यह प्रणाली पहले की तुलना में अधिक असरदार मानी जा रही है। इसके प्रभाव से पहाड़ी क्षेत्रों में फिर से बर्फबारी और मैदानी इलाकों में बादलों की हलचल देखने को मिल सकती है। यदि बंगाल की खाड़ी से आने वाली नमी इस प्रणाली के साथ मिलती है, तो 15 से 20 फरवरी के बीच देश के कई हिस्सों में बादल छाने और कहीं-कहीं हल्की वर्षा होने की संभावना बन सकती है।

यह स्थिति विशेष रूप से उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत में मौसम को प्रभावित कर सकती है। हालांकि अभी व्यापक वर्षा की संभावना कम है, लेकिन तापमान में थोड़ी गिरावट और वातावरण में नमी बढ़ सकती है।

दक्षिण और तटीय भारत में बढ़ती चिंता

तापमान में असामान्य वृद्धि

दक्षिण भारत और पश्चिमी तटीय क्षेत्रों में स्थिति अपेक्षाकृत अधिक चिंताजनक होती जा रही है। कोंकण, गोवा और तटीय कर्नाटक जैसे क्षेत्रों में तापमान सामान्य से लगभग 4 से 5 डिग्री सेल्सियस तक अधिक दर्ज किया जा सकता है। यह बढ़ोतरी फरवरी के महीने के हिसाब से असामान्य मानी जा रही है। लगातार शुष्क मौसम और बादलों की कमी के कारण सूर्य की तीव्रता सीधे जमीन तक पहुँच रही है।

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लू की संभावना और अलर्ट

इन परिस्थितियों को देखते हुए कुछ क्षेत्रों में लू जैसी स्थिति बनने की आशंका जताई गई है। हालांकि यह पारंपरिक ग्रीष्मकालीन लू नहीं होगी, फिर भी तापमान और आर्द्रता का संयोजन लोगों के स्वास्थ्य पर असर डाल सकता है। विशेषज्ञों ने विशेष रूप से बुजुर्गों, बच्चों और बाहर काम करने वाले लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी है। पर्याप्त पानी पीना, धूप से बचाव करना और दोपहर के समय अनावश्यक बाहर निकलने से बचना जरूरी बताया गया है।

महाराष्ट्र और आंतरिक दक्षिण भारत में शुष्क हालात

महाराष्ट्र के आंतरिक भागों और दक्षिण भारत के कई हिस्सों में लंबे समय से बारिश की कमी देखी जा रही है। इस कारण मिट्टी में नमी घट रही है और तापमान में तेजी से बढ़ोतरी हो रही है। जलवायु परिवर्तन के प्रभाव भी इन असामान्य परिस्थितियों के पीछे एक प्रमुख कारण माने जा रहे हैं। फरवरी जैसे संक्रमण काल में इतनी गर्मी सामान्य नहीं मानी जाती।

कृषि क्षेत्र पर इसका प्रभाव पड़ सकता है, विशेषकर उन फसलों पर जो हल्की ठंड पर निर्भर रहती हैं। किसानों को सलाह दी गई है कि वे फसलों की सिंचाई पर विशेष ध्यान दें और मौसम के बदलते रुख को देखते हुए आवश्यक कदम उठाएँ।

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पश्चिमी और मध्य भारत में बदलता परिदृश्य

राजस्थान और गुजरात जैसे राज्यों में भी गर्म और शुष्क हवाएँ तापमान को बढ़ा रही हैं। दिन के समय धूप तेज हो रही है और आर्द्रता कम होने से वातावरण शुष्क महसूस हो रहा है। 14 और 15 फरवरी तक अधिकांश हिस्सों में मौसम शुष्क बने रहने की संभावना है, लेकिन उसके बाद अरब सागर और बंगाल की खाड़ी से आने वाली नमी मिलकर कुछ स्थानों पर बादलों का निर्माण कर सकती है।

यदि यह नमी पश्चिमी विक्षोभ के साथ प्रभावी रूप से जुड़ती है, तो मध्य प्रदेश, राजस्थान और गुजरात के कुछ हिस्सों में हल्की वर्षा या बादलों की घनी परत देखी जा सकती है। हालांकि यह व्यापक वर्षा प्रणाली नहीं होगी, लेकिन तापमान में अस्थायी गिरावट संभव है।

सुबह-शाम ठंड, दिन में तेज धूप

फिलहाल देश के अधिकांश हिस्सों में सुबह और रात के समय हल्की ठंडक बनी हुई है। परंतु दिन के समय सूरज की तीव्रता तेजी से बढ़ रही है। यह अंतर स्वास्थ्य पर भी असर डाल सकता है, क्योंकि अचानक तापमान में बदलाव से सर्दी-जुकाम जैसी समस्याएँ बढ़ सकती हैं।

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मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले सप्ताह में दिन का तापमान और ऊपर जा सकता है, जबकि रात का तापमान धीरे-धीरे सामान्य स्तर पर आ जाएगा। यह बदलाव सर्दी के धीरे-धीरे विदा होने का संकेत है।

आम लोगों और किसानों के लिए सलाह

बढ़ते तापमान और संभावित लू की स्थिति को देखते हुए सभी को सतर्क रहने की आवश्यकता है। पर्याप्त पानी का सेवन करें, हल्के और ढीले कपड़े पहनें तथा दोपहर की तेज धूप से बचें। किसानों को सलाह दी गई है कि वे फसलों की नियमित सिंचाई करें और मौसम पूर्वानुमान पर नजर रखें।

कुल मिलाकर, फरवरी का यह समय मौसम की दृष्टि से बेहद सक्रिय और परिवर्तनशील बना हुआ है। बंगाल की खाड़ी में बन रही परिस्थितियाँ और पश्चिमी विक्षोभ की सक्रियता मिलकर आने वाले दिनों में देश के मौसम को नई दिशा दे सकती हैं। ऐसे में सतर्कता और सही जानकारी ही सबसे बड़ा बचाव है।

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