18 फरवरी 2026 से बदल जाएंगे GPay, PhonePe और Paytm डिजिटल पेमेंट के नियम, जानें पूरी डिटेल UPI New Rules 2026

By Vishwaja V

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UPI New Rules 2026

UPI New Rules 2026: फरवरी 2026 डिजिटल लेनदेन करने वालों के लिए एक अहम मोड़ लेकर आ रहा है। 18 फरवरी से यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस यानी UPI के नियमों में बड़े बदलाव लागू किए जा रहे हैं। इन बदलावों का उद्देश्य सिर्फ सिस्टम को अपडेट करना नहीं, बल्कि उसे और अधिक सुरक्षित, तेज़ और भरोसेमंद बनाना है। आज भारत में छोटी से छोटी दुकान से लेकर बड़े व्यापार तक UPI के सहारे चल रहे हैं। ऐसे में इन नए नियमों को समझना हर यूजर के लिए जरूरी हो जाता है, चाहे वह Google Pay, PhonePe, Paytm या किसी अन्य UPI ऐप का इस्तेमाल करता हो। नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने सर्वर पर बढ़ते दबाव, बार-बार होने वाले ट्रांजैक्शन फेल्योर और सुरक्षा से जुड़े जोखिमों को देखते हुए यह कदम उठाया है। आइए विस्तार से समझते हैं कि क्या-क्या बदलेगा और इसका सीधा असर आपकी रोजमर्रा की पेमेंट आदतों पर कैसे पड़ेगा।

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1. बैलेंस चेक करने की दैनिक सीमा तय

अब UPI ऐप के माध्यम से बैंक बैलेंस चेक करने की एक तय सीमा होगी। किसी भी एक ऐप से आप दिनभर में अधिकतम 50 बार ही अपना बैलेंस देख सकेंगे। यदि आपके मोबाइल में दो अलग-अलग UPI ऐप हैं, तो दोनों से मिलाकर कुल 100 बार बैलेंस चेक किया जा सकता है। यह बदलाव इसलिए किया गया है क्योंकि बार-बार बैलेंस देखने से बैंक सर्वर पर अनावश्यक दबाव पड़ता है। कई यूजर हर छोटे ट्रांजैक्शन के बाद बैलेंस चेक करते हैं, जिससे सिस्टम पर अतिरिक्त लोड बढ़ता है। अब यूजर्स को थोड़ा संयम बरतना होगा और बार-बार बैलेंस देखने की आदत छोड़नी होगी।

2. लिंक्ड बैंक अकाउंट डिटेल देखने की लिमिट

UPI में “लिस्ट अकाउंट API” के जरिए यूजर अपने लिंक्ड बैंक अकाउंट की जानकारी देख सकते हैं। अब इस सुविधा पर भी सीमा तय कर दी गई है। हर यूजर एक ऐप के जरिए दिन में अधिकतम 25 बार ही अपने जुड़े हुए बैंक खातों की सूची देख पाएगा। इस नियम का उद्देश्य बैंकिंग सिस्टम पर पड़ने वाले अनावश्यक रिक्वेस्ट लोड को कम करना है। तकनीकी रूप से यह बदलाव सिस्टम को स्थिर बनाए रखने की दिशा में उठाया गया कदम है।

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3. UPI ऑटोपे ट्रांजैक्शन के लिए नया समय

आजकल सब्सक्रिप्शन, EMI, मोबाइल रिचार्ज, बिजली बिल और अन्य नियमित भुगतान UPI ऑटोपे के जरिए होते हैं। अब इन ऑटोपे ट्रांजैक्शनों को केवल नॉन-पीक आवर्स में प्रोसेस किया जाएगा। यानी भीड़भाड़ वाले समय में ये भुगतान नहीं होंगे। इसके साथ ही हर ऑटोपे रिक्वेस्ट के लिए अधिकतम चार प्रयास ही किए जाएंगे—एक मूल प्रयास और तीन पुनः प्रयास। यदि इसके बाद भी ट्रांजैक्शन सफल नहीं होता, तो उसे असफल माना जाएगा। यह कदम ट्रांजैक्शन फेल्योर कम करने और सर्वर पर लोड संतुलित रखने के लिए उठाया गया है।

4. 12 महीने से निष्क्रिय UPI ID होगी बंद

अगर आपकी UPI ID पिछले 12 महीनों से इस्तेमाल में नहीं आई है, तो वह स्वतः निष्क्रिय कर दी जाएगी। यह नियम सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लागू किया गया है। अक्सर मोबाइल नंबर समय के साथ किसी दूसरे व्यक्ति को अलॉट हो जाते हैं। ऐसे में पुरानी UPI ID के सक्रिय रहने से सुरक्षा जोखिम पैदा हो सकता है। अब निष्क्रिय आईडी को अपने आप बंद कर दिया जाएगा ताकि गलत हाथों में डिजिटल एक्सेस न पहुंचे।

5. बैंक अकाउंट लिंकिंग के लिए कड़ी जांच

UPI में नया बैंक अकाउंट जोड़ते समय अब अधिक सख्त वेरिफिकेशन और यूजर ऑथेंटिकेशन प्रक्रिया अपनाई जाएगी। पहले की तुलना में अब पहचान की पुष्टि और सुरक्षा जांच ज्यादा मजबूत होगी। इसका उद्देश्य फर्जी अकाउंट जोड़ने की घटनाओं को रोकना और डिजिटल धोखाधड़ी पर लगाम लगाना है। यूजर्स को अकाउंट लिंक करते समय अतिरिक्त सुरक्षा चरणों से गुजरना पड़ सकता है।

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6. API रिस्पॉन्स टाइम में बड़ा बदलाव

अब जरूरी ट्रांजैक्शन API का रिस्पॉन्स टाइम 30 सेकंड से घटाकर 10 सेकंड कर दिया गया है। यानी यदि कोई पेमेंट रिक्वेस्ट भेजी जाती है, तो उसका जवाब अधिकतम 10 सेकंड के भीतर मिलना चाहिए। इससे रियल-टाइम ट्रांजैक्शन और तेज़ होंगे और यूजर्स को “पेंडिंग” स्टेटस में ज्यादा देर इंतजार नहीं करना पड़ेगा। दुकानदारों और ग्राहकों दोनों के लिए यह बदलाव बेहद फायदेमंद साबित हो सकता है।

7. UPI के जरिए क्रेडिट लाइन से भुगतान की सुविधा

आने वाले महीनों में UPI के जरिए प्री-अप्रूव्ड क्रेडिट लाइन से पेमेंट या विदड्रॉ की सुविधा भी मिलेगी। यदि किसी बैंक या NBFC ने आपको पहले से क्रेडिट लाइन या ओवरड्राफ्ट की अनुमति दी है, तो आप उसी राशि से सीधे UPI के माध्यम से भुगतान कर सकेंगे। यह सुविधा खास तौर पर उन लोगों के लिए उपयोगी होगी जिन्हें अल्पकालिक फंड की जरूरत पड़ती है। इससे छोटे व्यापारियों और व्यक्तिगत उपयोगकर्ताओं को अतिरिक्त वित्तीय लचीलापन मिलेगा।

इन बदलावों का मुख्य उद्देश्य

इन सभी नियमों के पीछे तीन बड़े लक्ष्य हैं—सिस्टम पर बढ़ते दबाव को नियंत्रित करना, सुरक्षा को मजबूत बनाना और ट्रांजैक्शन फेल्योर कम करना। डिजिटल भुगतान की दुनिया तेजी से बढ़ रही है। करोड़ों लोग हर दिन UPI का इस्तेमाल कर रहे हैं। ऐसे में तकनीकी सुधार समय-समय पर जरूरी हो जाते हैं ताकि व्यवस्था स्थिर और भरोसेमंद बनी रहे।

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यूजर्स के लिए जरूरी सलाह

यदि आप नियमित रूप से डिजिटल पेमेंट करते हैं—चाहे दुकानदार हों, फ्रीलांसर हों या नौकरीपेशा व्यक्ति—तो इन नियमों को ध्यान में रखते हुए अपनी भुगतान आदतों को थोड़ा व्यवस्थित करें। बार-बार बैलेंस चेक करने से बचें, निष्क्रिय UPI ID का समय-समय पर उपयोग करें और ऑटोपे ट्रांजैक्शन की स्थिति पर नजर रखें। साथ ही, ऐप और बैंक द्वारा जारी किए जाने वाले नोटिफिकेशन पर ध्यान दें। यदि कोई नई वेरिफिकेशन प्रक्रिया सामने आती है, तो उसे सावधानीपूर्वक पूरा करें। डिजिटल भारत की इस यात्रा में बदलाव स्वाभाविक हैं। समझदारी इसी में है कि हम इन नियमों को समय रहते समझें और खुद को नई व्यवस्था के अनुरूप ढाल लें। 18 फरवरी 2026 से लागू हो रहे ये नए नियम आने वाले समय में UPI सिस्टम को और मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकते हैं।

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