Weather Update: फरवरी का महीना आमतौर पर सर्दी के धीरे-धीरे विदा लेने और बसंती मौसम की शुरुआत का संकेत देता है। इस समय देश के अधिकांश हिस्सों में सुबह-शाम हल्की ठंडक महसूस होती है, जबकि दोपहर में धूप तेज और चुभन भरी लगने लगती है। इसी बीच मौसम विभाग के आकलनों के अनुसार, 17 फरवरी के आसपास देश के मौसम में एक नया बदलाव देखने को मिल सकता है। पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने और कुछ क्षेत्रों में निम्न दबाव के विकास के कारण कई राज्यों में बादल, हल्की बारिश और पहाड़ी इलाकों में बर्फबारी की संभावना जताई जा रही है।
वर्तमान मौसम की स्थिति
अभी उत्तर-पश्चिम भारत में शुष्क हवाओं का प्रभाव बना हुआ है। इन हवाओं के कारण मैदानी इलाकों में आकाश साफ है, जिससे दिन में तेज धूप निकल रही है। तापमान में दिन और रात के बीच अंतर बढ़ गया है—सुबह-शाम ठंडक, लेकिन दोपहर में गर्माहट।
उत्तर भारत के राज्यों जैसे राजस्थान, हरियाणा, दिल्ली और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में मौसम फिलहाल स्थिर और सूखा है। खेतों में रबी फसलें जैसे गेहूं, सरसों और चना अच्छी स्थिति में हैं, क्योंकि अत्यधिक ठंड या बारिश का दबाव नहीं है।
पूर्वी भारत—बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल—में भी मौसम साफ और शुष्क बना हुआ है। यहां धीरे-धीरे तापमान बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं, जो आने वाले दिनों में सर्दी के अंत की ओर इशारा करते हैं।
15 फरवरी के आसपास का अनुमान
मध्य फरवरी तक देश के अधिकांश भागों में मौसम साफ रहने की संभावना है। धार्मिक आयोजनों और यात्राओं के लिहाज से यह अनुकूल स्थिति मानी जा रही है। पहाड़ी राज्यों के कुछ ऊंचे हिस्सों को छोड़कर कहीं भी व्यापक बारिश या आंधी के संकेत नहीं हैं।
पूर्वोत्तर भारत के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में हल्की बौछारें या बादलों की गतिविधि देखी जा सकती है, लेकिन मैदानी इलाकों पर इसका प्रभाव सीमित रहने की उम्मीद है।
17 फरवरी से सक्रिय होगा पश्चिमी विक्षोभ
पश्चिमी विक्षोभ क्या है?
पश्चिमी विक्षोभ एक मौसमी प्रणाली है, जो भूमध्यसागर के क्षेत्र से उत्पन्न होकर पश्चिमी एशिया के रास्ते भारत के उत्तर-पश्चिमी भागों तक पहुँचती है। यह प्रणाली सर्दियों और शुरुआती वसंत के दौरान उत्तर भारत के मौसम को प्रभावित करती है।
संभावित प्रभाव
17 फरवरी के आसपास एक नया पश्चिमी विक्षोभ हिमालयी क्षेत्रों में प्रवेश कर सकता है। इसके प्रभाव से:
- जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के ऊंचे इलाकों में हल्की बर्फबारी
- हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में बादल व हल्की वर्षा
- पहाड़ी क्षेत्रों में तापमान में गिरावट
यह गतिविधि पर्यटन और स्थानीय आवागमन को प्रभावित कर सकती है, खासकर ऊंचाई वाले मार्गों पर।
प्रेरित चक्रवाती परिसंचरण का विकास
पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से मैदानी क्षेत्रों में एक प्रेरित चक्रवाती हवाओं का क्षेत्र विकसित हो सकता है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, 18 फरवरी के आसपास यह परिसंचरण राजस्थान और उससे सटे पाकिस्तान के भागों के ऊपर बन सकता है।
राजस्थान में मौसम
18 और 19 फरवरी को राजस्थान के कुछ हिस्सों में बादलों की आवाजाही और हल्की बारिश की संभावना बन रही है। संभावित प्रभावित क्षेत्र:
- जयपुर
- अजमेर
- सीकर
- अलवर
- भरतपुर
अच्छी बात यह है कि इस सिस्टम के साथ अत्यधिक तेज आंधी या ओलावृष्टि की आशंका कम मानी जा रही है। इससे फसलों को बड़े नुकसान की संभावना सीमित रहेगी।
हरियाणा, दिल्ली और उत्तर प्रदेश पर असर
हरियाणा और दिल्ली
18-19 फरवरी के दौरान हरियाणा और दिल्ली में:
- आंशिक बादल
- हल्की या छिटपुट बारिश
- न्यूनतम तापमान में हल्की बढ़ोतरी
गुड़गांव, फरीदाबाद, रोहतक जैसे क्षेत्रों में मौसम में बदलाव महसूस हो सकता है। दिल्ली-एनसीआर में बादलों के कारण दिन का तापमान थोड़ा नियंत्रित रह सकता है।
उत्तर प्रदेश
दक्षिणी और मध्य उत्तर प्रदेश में भी हल्की वर्षा की संभावना जताई जा रही है। संभावित प्रभावित शहर:
- आगरा
- मथुरा
- झांसी
- कानपुर
- प्रयागराज
यह बारिश हल्की और अल्पकालिक रहने की उम्मीद है, जिससे दैनिक गतिविधियों पर बड़ा प्रभाव नहीं पड़ेगा।
मध्य प्रदेश में बादलों की गतिविधि
मध्य प्रदेश के उत्तरी और पूर्वी हिस्सों में भी मौसम में परिवर्तन के संकेत मिल रहे हैं।
संभावित प्रभावित संभाग:
- ग्वालियर
- चंबल
- सागर
- रीवा
यहां हल्की बौछारें या बादल छाए रहने की स्थिति बन सकती है। तापमान में अत्यधिक गिरावट की संभावना कम है, लेकिन मौसम सुहावना हो सकता है।
पूर्वी भारत में शुष्क मौसम जारी
बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल और छत्तीसगढ़ में मौसम मुख्य रूप से सूखा रहने का अनुमान है। इन क्षेत्रों में:
- साफ आसमान
- तापमान में धीरे-धीरे वृद्धि
- सर्दी का प्रभाव कम
यह स्थिति किसानों के लिए लाभदायक हो सकती है, क्योंकि फसलों पर नमी या रोगों का खतरा कम रहेगा।
दक्षिण भारत में निम्न दबाव का असर
निम्न दबाव क्षेत्र का विकास
दक्षिण भारत के समुद्री क्षेत्रों में एक सशक्त निम्न दबाव का क्षेत्र विकसित होने की संभावना है। इसका प्रभाव 17-18 फरवरी से तमिलनाडु और केरल में दिखाई दे सकता है।
तमिलनाडु में बारिश
दक्षिणी तमिलनाडु के जिलों में:
- मध्यम से भारी वर्षा
- बादलों की घनी परत
- कुछ स्थानों पर तेज बारिश
संभावित प्रभावित क्षेत्र:
- कन्याकुमारी
- मदुरई
- रामनाथपुरम
केरल में मौसम
केरल के तटीय और आंतरिक भागों में भी अच्छी बारिश के संकेत हैं। इससे तापमान में कमी और मौसम में ठंडक लौट सकती है।
महाराष्ट्र और गुजरात में तापमान में बदलाव
पश्चिमी और मध्य भारत में हवाओं का रुख बदलने से न्यूनतम तापमान में बढ़ोतरी दर्ज की जा सकती है।
संभावित प्रभाव:
- रात की ठंड में कमी
- सुबह-शाम हल्की गर्माहट
- सर्दी का लगभग अंत
यह बदलाव संकेत देता है कि इन राज्यों में सर्दी अब अंतिम चरण में है।
किसानों और आमजन के लिए महत्व
कृषि पर प्रभाव
हल्की बारिश के संभावित फायदे:
- गेहूं और सरसों जैसी रबी फसलों को नमी
- मिट्टी की नमी में सुधार
- तापमान में संतुलन
यदि ओलावृष्टि या तेज आंधी नहीं होती, तो यह बारिश लाभकारी सिद्ध हो सकती है।
स्वास्थ्य और दैनिक जीवन
मौसम बदलने के दौरान:
- सर्दी-जुकाम के मामले बढ़ सकते हैं
- एलर्जी की समस्या
- तापमान के उतार-चढ़ाव से असहजता
लोगों को मौसम के अनुसार कपड़ों और खान-पान में संतुलन रखना चाहिए।
निष्कर्ष
17 फरवरी के आसपास देश के विभिन्न हिस्सों में मौसम में बदलाव के संकेत मिल रहे हैं। उत्तर भारत में पश्चिमी विक्षोभ के कारण बादल, हल्की बारिश और पहाड़ी क्षेत्रों में बर्फबारी की संभावना है, जबकि दक्षिण भारत में निम्न दबाव के चलते कुछ स्थानों पर अच्छी वर्षा हो सकती है।
हालांकि, अधिकांश गतिविधियां सामान्य रहने की उम्मीद है, लेकिन मौसम के इन परिवर्तनों पर नजर रखना जरूरी है। सही तैयारी और सतर्कता से किसान, यात्री और आमजन इस बदलते मौसम का बेहतर ढंग से सामना कर सकते हैं।










