Weather Update India: देशभर में मौसम ने एक बार फिर करवट लेनी शुरू कर दी है। 15 फरवरी के ताजा आंकड़ों से संकेत मिलता है कि पूरे भारत में दिन के तापमान में लगातार वृद्धि हो रही है। खासतौर पर उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में धूप अब पहले से अधिक तेज और चुभन वाली महसूस की जा रही है। सर्दियों के अंतिम चरण में यह बदलाव लोगों के दैनिक जीवन के साथ-साथ कृषि गतिविधियों को भी प्रभावित कर सकता है।
उत्तर भारत में दिन गरम, सुबह-शाम ठंडक बरकरार
दिल्ली-एनसीआर सहित पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में दिन का तापमान सामान्य से ऊपर दर्ज किया जा रहा है। दिल्ली में दोपहर के समय धूप काफी तीखी महसूस हो रही है, जबकि सुबह और रात के समय हल्की ठंड अभी भी बनी हुई है। इसका मुख्य कारण उत्तर दिशा से आने वाली शुष्क हवाएं हैं, जो रात में तापमान को नीचे बनाए रखती हैं लेकिन दिन में तेज धूप के कारण पारा तेजी से ऊपर चढ़ जाता है।
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, यह तापमान अंतर शरीर पर प्रभाव डाल सकता है। सुबह ठंड और दोपहर में गर्मी की स्थिति से सर्दी-जुकाम और वायरल संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है। किसानों के लिए भी यह समय सावधानी बरतने का है, क्योंकि फसलों पर तापमान के उतार-चढ़ाव का असर पड़ सकता है।
तटीय इलाकों में असामान्य गर्मी, लू जैसे हालात
इस बार फरवरी में ही पश्चिमी तटीय क्षेत्रों में असामान्य गर्मी देखी जा रही है। महाराष्ट्र और कर्नाटक के समुद्री किनारे वाले इलाकों में तापमान इतना बढ़ गया है कि कुछ स्थानों पर लू जैसी परिस्थितियां बनने लगी हैं। आमतौर पर फरवरी में इस तरह की गर्मी कम ही देखने को मिलती है, इसलिए इसे मौसम के असामान्य रुझान के रूप में देखा जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि समुद्र से आने वाली नमी और बदलते वायुमंडलीय दबाव के कारण तापमान में यह तेजी आई है। यदि यही स्थिति बनी रहती है तो मार्च की शुरुआत में ही प्री-समर जैसी परिस्थितियां बन सकती हैं।
पश्चिमी विक्षोभ की एंट्री: 16 फरवरी से बदलाव के संकेत
अगले तीन दिनों के पूर्वानुमान में 16 फरवरी को एक पश्चिमी विक्षोभ के उत्तर भारत के पर्वतीय क्षेत्रों में पहुंचने की संभावना जताई गई है। इस सिस्टम के प्रभाव से जम्मू और कश्मीर तथा गिलगित-बाल्टिस्तान के ऊंचाई वाले इलाकों में बादलों की आवाजाही बढ़ सकती है। हालांकि प्रारंभिक चरण में भारी वर्षा या बर्फबारी की संभावना कम बताई जा रही है।
पश्चिमी विक्षोभ के आने से पहले उत्तर से चल रही ठंडी हवाएं कमजोर पड़ सकती हैं। इसका सीधा असर मैदानी क्षेत्रों पर पड़ेगा, जहां तापमान में और बढ़ोतरी हो सकती है। 16 फरवरी को मैदानों में मौसम शुष्क ही रहेगा, लेकिन वातावरण में नमी बढ़ने के कारण गुजरात और राजस्थान के कुछ हिस्सों में हल्के बादल दिखाई दे सकते हैं।
17 फरवरी से बढ़ेगी गतिविधि, हल्की बारिश के आसार
मौसम में वास्तविक परिवर्तन 17 फरवरी से देखने को मिल सकता है। जैसे-जैसे पश्चिमी विक्षोभ आगे बढ़ेगा, अरब सागर और बंगाल की खाड़ी दोनों ओर से नमी मिलने लगेगी। इस संयुक्त प्रभाव के कारण उत्तर-पश्चिमी भारत के कुछ हिस्सों में बादल विकसित हो सकते हैं।
राजस्थान, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के साथ-साथ मध्य प्रदेश के पश्चिमी भागों में कहीं-कहीं हल्की बूंदाबांदी या छिटपुट बारिश संभव है। हालांकि यह वर्षा व्यापक नहीं होगी, लेकिन तापमान में अस्थायी गिरावट ला सकती है और वातावरण में ठंडक का अहसास करा सकती है।
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पूर्वी भारत में शुष्क मौसम जारी
जहां पश्चिमी और मध्य भागों में हल्की गतिविधि की संभावना है, वहीं पूर्वी क्षेत्रों में मौसम पूरी तरह साफ रहने का अनुमान है। बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल सहित पूर्वी उत्तर प्रदेश के इलाकों में आसमान साफ रहेगा और बारिश की संभावना नगण्य है। इन क्षेत्रों में दिन के तापमान में धीरे-धीरे वृद्धि जारी रह सकती है।
शुष्क मौसम के कारण इन राज्यों में नमी की कमी बनी रहेगी, जिससे फसलों की सिंचाई पर अतिरिक्त ध्यान देना आवश्यक होगा।
सर्दियों की बारिश में कमी, आगे दो स्पेल की उम्मीद
सांख्यिकीय आंकड़ों के अनुसार, 1 जनवरी से 15 फरवरी के बीच सर्दियों की बारिश सामान्य से लगभग 50 प्रतिशत कम दर्ज की गई है। यह कमी जल स्रोतों और रबी फसलों के लिए चिंता का विषय बन सकती है। हालांकि मौसम विभाग को उम्मीद है कि फरवरी के अंत तक दो महत्वपूर्ण वर्षा चरण देखने को मिल सकते हैं।
पहला चरण 17 से 19 फरवरी के बीच सक्रिय हो सकता है, जबकि दूसरा 20 फरवरी के बाद प्रभाव दिखा सकता है। 20 फरवरी के बाद दक्षिण भारत की ओर से विकसित होने वाले सिस्टम के कारण मध्य और दक्षिण भारत के कुछ हिस्सों में वर्षा गतिविधियां बढ़ सकती हैं। इससे तापमान में संतुलन आने और नमी बढ़ने की संभावना है।
स्वास्थ्य और कृषि के लिए सावधानी जरूरी
बढ़ते तापमान और बदलते मौसम के बीच लोगों को अपनी दिनचर्या में संतुलन बनाए रखने की सलाह दी जा रही है। सुबह और शाम हल्की ठंड होने के कारण गर्म कपड़े पूरी तरह छोड़ना अभी जल्दबाजी हो सकती है। वहीं दोपहर में तेज धूप से बचाव के लिए पर्याप्त पानी पीना और हल्के वस्त्र पहनना लाभकारी रहेगा।
किसानों को फसलों की सिंचाई, कीट नियंत्रण और मौसम पूर्वानुमान पर विशेष ध्यान देना चाहिए। अचानक तापमान परिवर्तन से गेहूं, सरसों और अन्य रबी फसलों पर असर पड़ सकता है।
कुल मिलाकर, फरवरी का यह दौर मौसम के संक्रमण काल को दर्शाता है, जहां सर्दी विदा ले रही है और गर्मी दस्तक दे रही है। आने वाले दिनों में पश्चिमी विक्षोभ और दक्षिणी सिस्टम के प्रभाव से कुछ क्षेत्रों में राहत मिल सकती है, लेकिन तापमान में बढ़ोतरी का रुझान फिलहाल जारी रहने की संभावना है।











