Weather Update Today: देश के विभिन्न हिस्सों में मौसम एक बार फिर करवट लेने जा रहा है। मौसम विभाग के ताजा संकेतों के अनुसार समुद्र के ऊपर एक सक्रिय प्रणाली विकसित होने की संभावना है, जिसका असर आने वाले दो दिनों में साफ तौर पर दिखाई दे सकता है। खासतौर पर उत्तर भारत और तटीय इलाकों में बारिश, तेज हवाओं और पहाड़ी क्षेत्रों में बर्फबारी की संभावना जताई गई है। इसके मद्देनजर संबंधित राज्यों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है, वहीं मछुआरों को समुद्र में न जाने की चेतावनी भी जारी की गई है।
समुद्र में बन सकता है लो प्रेशर एरिया
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार पूर्वी भूमध्यरेखीय हिंद महासागर और दक्षिण-पूर्वी बंगाल की खाड़ी से सटे क्षेत्रों में ऊपरी वायुमंडल में चक्रवाती परिसंचरण सक्रिय हो चुका है। यह परिसंचरण समुद्र तल से लगभग 5.8 किलोमीटर की ऊंचाई तक फैला हुआ है। इसी प्रणाली के प्रभाव से अगले 48 घंटों में दक्षिणी और मध्य बंगाल की खाड़ी के हिस्सों में कम दबाव का क्षेत्र बनने की संभावना है।
जब समुद्र के ऊपर लो प्रेशर एरिया बनता है, तो वह आसपास के इलाकों के मौसम को तेजी से प्रभावित करता है। इससे बादल घिरने, तेज हवाएं चलने और भारी वर्षा जैसी स्थितियां बन सकती हैं। यदि यह प्रणाली और अधिक मजबूत होती है, तो इसका असर तटीय राज्यों के अलावा अंदरूनी क्षेत्रों में भी महसूस किया जा सकता है।
उत्तर भारत में बारिश और बर्फबारी के आसार
उत्तर भारत के ऊपरी हिस्सों में भी मौसम में बदलाव के संकेत मिल रहे हैं। वायुमंडल की ऊंची परतों में लगभग 12.6 किलोमीटर की ऊंचाई पर सबट्रॉपिकल वेस्टर्ली जेट स्ट्रीम सक्रिय है, जिसकी गति करीब 140 नॉट बताई जा रही है। इस तेज रफ्तार जेट स्ट्रीम के कारण पश्चिमी विक्षोभ को मजबूती मिल रही है, जो पहाड़ी राज्यों में वर्षा और हिमपात का कारण बन सकता है।
17 से 19 फरवरी के बीच जम्मू-कश्मीर, लद्दाख और मुजफ्फराबाद के कई इलाकों में हल्की से मध्यम बारिश या बर्फबारी की संभावना जताई गई है। ऊंचाई वाले क्षेत्रों में भारी हिमपात भी हो सकता है, जिससे तापमान में गिरावट और यातायात प्रभावित होने की आशंका है। हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में भी 17 और 18 फरवरी को वर्षा या बर्फबारी के संकेत हैं। पर्यटकों और स्थानीय निवासियों को मौसम संबंधी अपडेट पर नजर बनाए रखने की सलाह दी गई है।
मैदानी इलाकों में गरज-चमक के साथ बारिश
पहाड़ी क्षेत्रों के अलावा मैदानी राज्यों में भी मौसम बदला-बदला रहेगा। पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली-एनसीआर, उत्तर प्रदेश और राजस्थान में 17 और 18 फरवरी को बादल छाए रहने के साथ हल्की वर्षा की संभावना है। कुछ स्थानों पर गरज-चमक और बिजली गिरने की घटनाएं भी हो सकती हैं।
18 और 19 फरवरी को यही मौसम मध्य प्रदेश के कई हिस्सों में भी देखने को मिल सकता है। ऐसे में किसानों को फसलों की सुरक्षा के लिए जरूरी इंतजाम करने की सलाह दी गई है। खुले मैदानों में काम कर रहे लोगों को खराब मौसम के दौरान सुरक्षित स्थान पर रहने की हिदायत दी गई है।
अंडमान-निकोबार में तेज हवाओं का अनुमान
तटीय और द्वीपीय क्षेत्रों में भी मौसम सक्रिय रहेगा। 16 और 17 फरवरी को निकोबार द्वीप समूह में 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने और गरज-चमक के साथ बारिश होने की संभावना है। इसके बाद 18 और 19 फरवरी को अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में भी इसी तरह का मौसम बने रहने का अनुमान है।
समुद्री क्षेत्रों में तेज हवाओं और ऊंची लहरों की स्थिति बन सकती है, जिससे नौवहन गतिविधियां प्रभावित हो सकती हैं। प्रशासन ने स्थानीय लोगों और पर्यटकों से सावधानी बरतने की अपील की है।
तापमान में उतार-चढ़ाव की संभावना
मौसम प्रणाली के प्रभाव से उत्तर-पश्चिम भारत में तापमान में भी बदलाव देखने को मिल सकता है। अगले तीन दिनों के दौरान न्यूनतम तापमान में 2 से 3 डिग्री सेल्सियस तक की वृद्धि हो सकती है। हालांकि इसके बाद तापमान में फिर से 2 से 3 डिग्री की गिरावट दर्ज की जा सकती है।
पश्चिमी भारत में अगले 24 घंटों तक न्यूनतम तापमान में कोई बड़ा बदलाव नहीं होगा, लेकिन उसके बाद हल्की बढ़ोतरी संभव है। देश के अन्य हिस्सों में फिलहाल तापमान सामान्य के आसपास बने रहने की संभावना है और किसी बड़े बदलाव के संकेत नहीं हैं।
मछुआरों के लिए विशेष चेतावनी
समुद्र में संभावित खराब मौसम को देखते हुए मछुआरों को विशेष रूप से सतर्क रहने को कहा गया है। 15 से 20 फरवरी 2026 के बीच बंगाल की खाड़ी के कुछ हिस्सों, दक्षिण श्रीलंका तट के पास, गल्फ ऑफ मन्नार और आसपास के समुद्री क्षेत्रों में न जाने की सलाह दी गई है। इन क्षेत्रों में समुद्र की स्थिति खतरनाक हो सकती है, जिसमें तेज हवाएं और ऊंची लहरें शामिल हैं।
हालांकि अरब सागर के लिए फिलहाल कोई विशेष चेतावनी जारी नहीं की गई है, फिर भी समुद्री गतिविधियों से जुड़े लोगों को नियमित मौसम बुलेटिन पर नजर रखने की सलाह दी गई है।
सतर्कता ही है सुरक्षा
मौसम में तेजी से हो रहे बदलाव को देखते हुए आम नागरिकों को भी सतर्क रहने की आवश्यकता है। पहाड़ी इलाकों में यात्रा की योजना बना रहे लोगों को मौसम की ताजा जानकारी लेकर ही आगे बढ़ना चाहिए। बिजली गिरने और तेज आंधी के दौरान खुले स्थानों से दूर रहना बेहतर है।
कुल मिलाकर, अगले 48 घंटे देश के कई हिस्सों के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं। सक्रिय मौसम प्रणाली के कारण कहीं बारिश तो कहीं बर्फबारी देखने को मिल सकती है। समय पर सावधानी और प्रशासनिक निर्देशों का पालन ही किसी भी अप्रिय घटना से बचाव का सबसे बेहतर उपाय है।









