PM Kisan 22nd Installment 2026: देशभर के करोड़ों किसान इस समय प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की 22वीं किस्त का इंतजार कर रहे हैं। हर बार की तरह इस बार भी किसानों को उम्मीद है कि केंद्र सरकार जल्द ही उनके खातों में निर्धारित राशि स्थानांतरित करेगी। हालांकि, इस बार हालात कुछ अलग नजर आ रहे हैं। एक ओर किसानों की अपेक्षाएँ हैं, तो दूसरी ओर राज्यों की वित्तीय मांगें और प्रशासनिक प्रक्रियाएँ सरकार के सामने अतिरिक्त चुनौतियाँ खड़ी कर रही हैं।
पीएम किसान योजना के तहत पात्र किसानों को हर साल 6,000 रुपये की आर्थिक सहायता तीन समान किस्तों में दी जाती है। यह राशि सीधे किसानों के बैंक खातों में ट्रांसफर की जाती है, जिससे उन्हें खेती-किसानी से जुड़े खर्चों में कुछ राहत मिलती है। बढ़ती लागत, मौसम की अनिश्चितता और बाजार की चुनौतियों के बीच यह सहायता किसानों के लिए महत्वपूर्ण सहारा साबित होती है। ऐसे में 22वीं किस्त को लेकर उत्सुकता स्वाभाविक है।
आंध्र प्रदेश की वित्तीय मांग ने बढ़ाई चर्चा
हाल ही में आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान से मुलाकात कर राज्य के कृषि क्षेत्र से जुड़े लंबित फंड जारी करने की मांग उठाई है। राज्य सरकार का कहना है कि विभिन्न केंद्रीय योजनाओं के अंतर्गत करीब 1,211 करोड़ रुपये की राशि अब भी बकाया है, जिसे जल्द से जल्द जारी किया जाना चाहिए।
इस मांग में कई प्रमुख कृषि योजनाएँ शामिल हैं। मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से ‘पीएम प्रणाम’ योजना के तहत 216 करोड़ रुपये और ‘प्रति बूंद अधिक फसल’ योजना के तहत 95 करोड़ रुपये की लंबित राशि तुरंत जारी करने पर जोर दिया। राज्य सरकार का तर्क है कि इन योजनाओं का सीधा संबंध किसानों की आय बढ़ाने और संसाधनों के बेहतर उपयोग से है, इसलिए इनका समय पर क्रियान्वयन जरूरी है।
नारियल खेती और विशेष सहायता की मांग
आंध्र प्रदेश नारियल उत्पादन के लिए जाना जाता है। राज्य सरकार ने केंद्र से नारियल खेती के विकास के लिए अतिरिक्त वित्तीय सहयोग की भी मांग की है। उनका कहना है कि यदि इस क्षेत्र में निवेश बढ़ाया जाए तो किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि संभव है। नारियल आधारित उद्योगों को भी इससे बढ़ावा मिलेगा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
राज्य सरकार का यह भी कहना है कि कृषि विविधीकरण और विशेष फसलों के विकास के लिए अलग से पैकेज की जरूरत है। इससे छोटे और सीमांत किसानों को अधिक लाभ मिल सकेगा, जो अक्सर संसाधनों की कमी से जूझते हैं।
जैविक और प्राकृतिक खेती की ओर बढ़ता कदम
मुख्यमंत्री ने केंद्र को यह भी बताया कि राज्य में जैविक और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के प्रयास तेजी से किए जा रहे हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, राज्य ने रासायनिक उर्वरकों के उपयोग में लगभग 2.28 प्रतिशत की कमी दर्ज की है। यह संकेत देता है कि किसान धीरे-धीरे टिकाऊ खेती की ओर बढ़ रहे हैं।
बताया गया है कि लगभग 18 लाख किसान जैविक या प्राकृतिक खेती के तरीकों को अपनाने के लिए तैयार हैं। यदि इन प्रयासों को निरंतर समर्थन मिलता है, तो इससे न केवल उत्पादन की गुणवत्ता सुधरेगी बल्कि पर्यावरणीय संतुलन भी बेहतर होगा। इसके अलावा, बाजार में जैविक उत्पादों की बढ़ती मांग किसानों के लिए नए अवसर खोल सकती है।
22वीं किस्त की तारीख पर सस्पेंस
जहाँ तक पीएम किसान योजना की 22वीं किस्त का सवाल है, केंद्र सरकार की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक तिथि घोषित नहीं की गई है। हालांकि, विभिन्न स्तरों पर चर्चाओं और अटकलों के आधार पर यह संभावना जताई जा रही है कि फरवरी के अंतिम सप्ताह या मार्च के शुरुआती दिनों में यह किस्त जारी की जा सकती है।
संसद में भी इस योजना को लेकर चर्चा हुई है, जिससे यह संकेत मिलता है कि सरकार इस विषय पर गंभीरता से विचार कर रही है। आमतौर पर सरकार यह सुनिश्चित करने की कोशिश करती है कि किसानों को समय पर आर्थिक सहायता मिले, ताकि वे बुवाई, खाद-बीज की खरीद और अन्य आवश्यक कार्यों में बाधा का सामना न करें।
प्रशासनिक प्रक्रियाएँ और तकनीकी तैयारियाँ
किस्त जारी करने से पहले कई प्रशासनिक और तकनीकी प्रक्रियाओं को पूरा करना होता है। लाभार्थियों की सूची का सत्यापन, आधार और बैंक खातों का मिलान, तथा ई-केवाईसी की पुष्टि जैसी प्रक्रियाएँ अनिवार्य हैं। यदि किसी किसान का विवरण अधूरा या त्रुटिपूर्ण होता है, तो किस्त अटक सकती है।
इसी वजह से सरकार बार-बार किसानों से अपील करती है कि वे अपनी ई-केवाईसी प्रक्रिया पूरी करें और बैंक खाते की जानकारी सही रखें। कई मामलों में यह देखा गया है कि केवल तकनीकी त्रुटियों के कारण लाभार्थियों को समय पर भुगतान नहीं मिल पाता।
केंद्र और राज्यों के बीच समन्वय की आवश्यकता
वर्तमान स्थिति में केंद्र सरकार के सामने दोहरी चुनौती है। एक ओर उसे विभिन्न राज्यों की वित्तीय मांगों और लंबित फंड को लेकर संतुलन बनाना है, तो दूसरी ओर करोड़ों किसानों को समय पर किस्त पहुंचाने की जिम्मेदारी भी निभानी है। यदि राज्यों को आवश्यक संसाधन समय पर नहीं मिलते, तो कृषि क्षेत्र से जुड़े विकास कार्य प्रभावित हो सकते हैं।
केंद्र और राज्य सरकारों के बीच बेहतर समन्वय से ही इस समस्या का समाधान संभव है। योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन तभी हो सकता है जब दोनों स्तरों पर प्रशासनिक सहयोग और पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए।
किसानों के लिए जरूरी सुझाव
किसानों को सलाह दी जाती है कि वे अपने सभी दस्तावेज समय रहते अपडेट रखें। आधार से लिंक बैंक खाता, सही मोबाइल नंबर और पूर्ण ई-केवाईसी प्रक्रिया बेहद महत्वपूर्ण है। यदि कोई जानकारी अधूरी है, तो संबंधित पोर्टल या नजदीकी कॉमन सर्विस सेंटर के माध्यम से उसे ठीक कराया जा सकता है।
इसके अलावा, किसानों को यह भी ध्यान रखना चाहिए कि किसी भी प्रकार की अफवाह या अपुष्ट जानकारी पर भरोसा न करें। किस्त जारी होने से संबंधित आधिकारिक सूचना केवल सरकारी माध्यमों से ही प्राप्त करें।
निष्कर्ष
पीएम किसान सम्मान निधि योजना देश के किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण आर्थिक सहारा है। 22वीं किस्त को लेकर उत्सुकता स्वाभाविक है, लेकिन इसके साथ-साथ प्रशासनिक और वित्तीय चुनौतियाँ भी सामने हैं। राज्यों की मांगें, लंबित फंड और योजनाओं का क्रियान्वयन सरकार के लिए संतुलन साधने का कार्य बन गया है।
उम्मीद की जा रही है कि सरकार जल्द ही स्थिति स्पष्ट करेगी और किसानों के खातों में समय पर राशि ट्रांसफर की जाएगी। तब तक किसानों को अपने दस्तावेज अपडेट रखने और आधिकारिक घोषणाओं पर नजर बनाए रखने की आवश्यकता है, ताकि उन्हें इस महत्वपूर्ण योजना का लाभ बिना किसी बाधा के मिल सके।










